ईरान, इज़राइल और अमेरिका महायुद्ध से खाड़ी देशोंमें रह रहे एक करोड भारतीय संकटमे -पंतप्रधान नरेंद्र मोदी ने अपने नागरिकोंकी सुरक्ष केलिए तत्काल युद्ध विराम करने के लिए अपील करें -किशोर तिवारी
ईरान, इज़राइल और अमेरिका महायुद्ध से खाड़ी देशोंमें रह रहे एक करोड भारतीय संकटमे -पंतप्रधान नरेंद्र मोदी ने अपने नागरिकोंकी सुरक्ष केलिए तत्काल युद्ध विराम करने के लिए अपील करें -किशोर तिवारी
तारीख-७ अप्रैल २०२६
भारत जनता हर दूसरे परिवार का आदमी खाड़ी के देशमें हो रही पूरी घटनाक्रम पर बारीकी से नज़र रख रही है और खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले १ करोड़ भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षा को लेकर अत्यंत चिंतित है।मगर भारत सरकार अपने उत्तर दायित्व बच रही है मगर कल भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने भारत, जम्मू और कश्मीर के संबंध में 'ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन' (OIC) के प्रस्तावों को खारिज कर और उन्हें तथ्यात्मक रूप से गलत, अनुचित और "भ्रामक" बताता है। नई दिल्ली का कहना है कि भारत के आंतरिक मामलों में OIC का कोई 'लोकस स्टैंडी' (कानूनी अधिकार) नहीं है; भारत इस संगठन पर आरोप लगाता है कि पाकिस्तान इसका इस्तेमाल करके सांप्रदायिक या राजनीतिक बयान दिलवाता है यह बयान देकर भारत के विदेश निति जिन्दा है बताया है इसलिए मैंने आज मोदी जी को विनम्र निवेदन किया है, इस प्रकार किशोर तिवारी ने कहा है।
भारत ब्रिक्स राष्ट्रोंका (BRICS) के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में सभी पक्षों से आग्रह करना चाहिये अमेरिका के अध्यक्ष डोनाल्ड ट्रैम्प और भारत के मित्र इज़राइल ने कड़ी के देशमें रह रहे १ करोड़ भारतियों के लिए वे अत्यधिक संयम बरतें और शत्रुता को और बढ़ने से रोकें। नागरिकों के जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि रहनी चाहिए, और सभी कार्यों को अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून का सख्ती से पालन करना चाहिए मगर ईरानमे अमेरिका यह नहीं कर रहा हैं मगर इस नरसंहार पर भारत का चुप रहना या खोर अपराथ है भारत ने अपने ब्रिक्स राष्ट्रों के प्रती उत्तरदायित्व तो पूरा नहीं किया लेकिन अब भारत ने तत्काल कूटनीतिक जुड़ाव का उपयोग कर जान-माल के और नुकसान तथा क्षेत्रीय अस्थिरता को रोकने के लिए युद्धविराम की अपील करना चाहिए। गर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेशों में अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर ज़ोर देते हैं तो उन्हें इन नागरिकोंकी सुरक्षा तथा भलाई सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक नेताओं के साथ सक्रिय रूप से संपर्क में रह कर तनाव कम करने और शांति बहाल करने के उद्देश्य से किए जा रहे अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों में रचनात्मक योगदान देना चाहिए ।
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